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Thursday, 21 May 2015

कलावती पालयम् कन्या छात्रावास का शुभारंभ

वात्सल्य ग्राम, वृंदावन में बहुप्रतीक्षित कन्या छात्रावास का शुभारंभ विगत दिनों हुआ। यहाँ स्थित ‘समविद् गुरुकुलम सीनियर सेकेण्डरी स्कूल’ की छात्राओं की आवासीय सुविधा के लिए इसका निर्माण किया गया है। विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती गुरिन्दर कौर के साथ छात्राओं ने विधिवत् पूजन में भाग लेकर छात्रावास में प्रवेश किया। देश के विभिन्न भागों से आकर इस विद्यालय में अध्ययन करने वाली छात्राओं के लिए अति सुरक्षित यह भवन पूज्या दीदी माँ साध्वी ऋतम्भरा जी की स्वर्गीय माता श्रीमती कलावती जी के नाम समर्पित किया गया है। अपनी नयनाभिराम सुन्दरता के साथ ही यह भवन सर्वसुविधाओं से युक्त है। तीन मंजिला इस भवन में 500 छात्राओं के निवास करने की पर्याप्त व्यवस्था है। सुव्यवस्थित कमरों में छात्राओं के शयन एवं अध्ययन के लिए सुविधाजनक फर्नीचर बनाया गया है। प्रत्येक छात्रा के निजी सामान को रखने हेतु अलग-अलग आल्मारियों की व्यवस्था है। 

सुन्दर और सुरक्षित कमरों के अलावा इसमें एक विशाल सभागार है, जहाँ समय-समय पर छात्राओं के लिए शैक्षणिक एवं मनोरंजन कार्यक्रमों के आयोजन संबंधी दृश्य एवं श्रव्य सभी प्रकार की व्यवस्था है। अत्याधुनिक एवं स्वच्छ भोजन निर्माण रसोईघर के साथ इसमें एक विशाल भोजनशाला है जिसमें टेबल कुर्सियों पर एकसाथ 500 छात्राएं भोजन कर सकती हैं। भवन की ऊपरी मंजिल तक जाने के लिए लिफ्ट की व्यवस्था है। 

Wednesday, 8 April 2015

उत्तराखण्ड में वात्सल्य ग्राम निर्माण का शुभारम्भ


वात्सल्य सेवा केंद्र, उखीमठ
केदारघाटी आपदा के बाद पूज्या दीदी माँ साध्वी ऋतम्भराजी के पावन मार्गदर्शन में परमशक्ति पीठ द्वारा वहाँ आपदा पीडि़तों के सहायतार्थ व्यापक स्तर पर राहत अभियान संचालित किया गया था। जरूरतमन्द बच्चों के लिए ‘वात्सल्य सेवा केन्द्रों के माध्यम से निःशुल्क आवास तथा शिक्षा की व्यवस्था की गई। आपदाग्रस्त गाँवों में महिलाओं के लिए ‘वात्सल्य स्वावलंबन केन्द्रों’ के माध्यम से रोजगारमूलक प्रशिक्षण, जैसे सिलाई, कढ़ाई तथा कृत्रिम गहनों का निर्माण, प्रदान किये गए। आवश्यकता इस बात की महसूस की गई कि यहाँ एक स्थाई वात्सल्य ग्राम का निर्माण किया जाए।

    दीदी माँ जी की प्रेरणा से संस्था ने गुप्तकाशी में एक सुन्दर स्थान का चयन किया। भूमि क्रय करने के बाद निश्चित किया गया कि यहाँ पर वात्सल्य ग्राम का निर्माण किया जाएगा जिसमें विद्यालय, छात्रावास तथा प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र होगा। विगत दिनों परमशक्ति पीठ के महासचिव आदरणीय संजय भैया जी ने अपनी उत्तराखण्ड यात्रा के दौरान गुप्तकाशी पहुँचकर इस संबंध में क्रियान्वयन को अग्रसर किया। आपने जानकारी देते हुए बताया कि कुल 75 हजार वर्गफिट में वात्सल्य ग्राम, गुप्तकाशी का निर्माण किया जाना है। जिसकी प्रति वर्गफिट लागत 2100 रुपये है। योजना के प्रथम चरण निर्माण हेतु तैयारी हो चुकी है तथा शीघ्र ही कार्य आरंभ हो जाएगा। इस चरण में लगभग 20 से 25 हज़ार वर्गफिट निर्माण किया जाना है। इसी प्रकार दूसरे और तीसरे चरण का भी निर्माण होगा। 

उत्तराखण्ड में निर्मित इस वात्सल्य ग्राम के माध्यम से यहाँ के बच्चों को संस्कारपूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। समाज के सहयोग से बनाया जा रहा यह केन्द्र राष्ट्रनिर्माण का एक सुन्दर प्रयास होगा। आदरणीय संजय भैया ने ऊखीमठ एवं गुप्तकाशी स्थित वात्सल्य सेवा केन्द्र के बच्चों को अपना स्नेहाशीष प्रदानकर वहाँ मौसम की विपरीत परिस्थितियों के बीच रहकर कार्य कर रही बहनों का उत्साहवर्द्धन किया। इस अवसर पर पूज्य स्वामी ध्यानानन्द जी महाराज, श्री अजय गोयनका जी एवं श्री पुनीत गोयल भी उनके साथ रहे। 

Friday, 13 February 2015

‘वात्सल्य परिवार’ वल्र्ड रेकार्ड में शामिल

परमपूज्या दीदी माँ साध्वी ऋतम्भरा जी की पावन प्रेरणा से वात्सल्य ग्राम के माध्यम से निराश्रित बच्चों, युवतियों एवं वृद्धा माताओं के परिवार निर्माण के सुन्दर सामाजिक कार्य को संस्था ‘गोल्डन बुक आॅफ वल्र्ड रेकार्डस’ नेे अपने एशिया एडीशन में विश्व रेकार्ड के रूप में दर्ज किया गया है। अमेरिका की यह संस्था विश्व स्तर पर उन व्यक्तित्वों को अपने रेकार्ड में शामिल करती है जिन्होंने कोई असाधारण कार्य किया हो। निश्चित रूप से पूज्या दीदी माँ जी को प्रदान किया गया यह अलंकरण सारे भारतवासियों के लिए गर्व का विषय है।

    ‘गोल्डन बुक आॅफ वल्र्ड रेकार्डस’ की ओर से कार्यक्रम में सम्मिलित हुए उनके भारत के ‘नेशनल हेड’ डाॅ. मनीष विश्नोई ने संस्था की ओर से दर्ज किये गए ‘वल्र्ड रेकार्ड’ का प्रमाणपत्र पूज्या दीदी माँ जी को भेंट किया। दिनांक 3 जनवरी 2015 को इन्दौर में आयोजित ‘पूज्या दीदी माँ जी स्वर्ण जयंती वर्ष अभिनन्दन समारोह’ की भव्य प्रस्तुति के बीच यह अलंकरण प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष माननीया श्रीमती सुमित्रा महाजन, भारत सरकार की केन्द्रीय राज्यमंत्री पूज्या साध्वी निरंजन ज्योति जी तथा पूज्या साध्वी माँ कनकेश्वरी देवी जी सहित नगर के हज़ारों-हज़ार नागरिकगणों ने करतल ध्वनि के साथ गौरव के इन क्षणों का अभिनन्दन किया।

Tuesday, 18 November 2014

श्री कामधेनु गौगृह - गौवंष का सुन्दर एवं सुरक्षित आश्रय

वात्सल्य ग्राम की गौशाला में जन्में इस नन्हें नवजात बछड़े को देखकर सहसा ही आपका दुलार फूट पड़ा होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के कत्लखानों में भोर की पहली किरण के साथ जाने कितनी गौमाताओं को दर्दनाक तरीके से मारने के बाद उनके ऐसे ही सुकोमल गर्भस्थ बछड़ों को मारकर उनकी खाल निकाली जाती है ताकि उनके मुलायम चमड़े द्वारा पर्स या बेल्ट जैसी अनेक वस्तुएं बनाकर ऊँचे दामों पर बेची जा सकें। केवल वही गौवंश इस बर्बरता का शिकार होने से बच पाता है जिनकी देखभाल गौशालाएं कर रही हैं। ‘श्री कामधेनु गौगृह’ एक ऐसी ही सुन्दर गौशाला है जहाँ पूज्या दीदी माँ जी के मार्गदर्शन में 20 प्रकार की भारतीय नस्लों की गायों के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य चल रहा है। आप भी इस पुण्यकार्य में अपना सहयोग प्रदानकर गौवंश की रक्षा में योगदान दे सकते हैं।

Saturday, 30 August 2014

विशेष बच्चों की आशाकिरण ‘वैशिष्ट्यम्’

उपनिषद् का वाक्य है कि पूर्ण से मात्र पूर्ण ही उत्पन्न हो सकता है। अतः इस सृष्टि में जो भी है वह पूर्ण श्रेष्ठ व उत्तम है। उसमें किसी भी प्रकार की कमी व त्रुटि देखना एक दृष्टिकोण हो सकता है लेकिन वास्तविकता नहीं। जन्म व मरण इस संसार चक्र की धुरी है जो इस सृष्टि को निरंतर गतिमान रखती है। इस संसार में जिसने भी जन्म लिया वह उत्तम है। किन्तु कई बार देखा गया है कि कुछ बच्चे जन्म से ही किसी मानसिक व शारीरिक विकलांगता के शिकार होते हैं। उनका जीवन पूर्णरूपेण पराधीन होता है। मैं समझती हूँ कि परमात्मा की बनाई हर रचना उत्तम है चाहे वह शारीरिक या मानसिक रूप से कुछ अपूर्णता ही लिए क्यों न हो। जहाँ परमात्मा ने कुछ कमी की है उसके बदले वहाँ किसी अन्य विशेषता के साथ उसकी पूर्ति भी वह स्वयं ही करता है। इस प्रकार से विकलांग बच्चों को परमात्मा का विशिष्ट आशीर्वाद किसी न किसी विशिष्ट गुण के रूप में मिलता है, आवश्यकता है उन्हें एक ऐसा वातावरण देने की जहाँ उनके उस विशिष्ट गुण को नई दिशा मिले, परिणामतः वे संसार में सम्मान व स्वाभिमान के साथ अपना जीवनयापन कर सकें। ऐसा कर सकना समाज के प्रत्येक समर्थ नागरिक के लिए एक चुनौतीपूर्ण कर्तव्य है’

वात्सल्य ग्राम, वृंदावन का पालनाघर आरंभ करने के दिन से ही हमारा यह अनुभव रहा है कि यहाँ माता-पिता अपनी जन्मजात मानसिक या शारीरिक विकलांग संतानों को छोड़ जाते हैं। इस विकलांगता का वैज्ञानिक कारण चाहे जो भी रहा हो लेकिन मैं यह विश्वासपूर्वक कह सकती हूँ कि यदि ऐसा कोई बच्चा किसी परिवार में आया है तो उसे बिना किसी पालनाघर में छोड़े, प्रयत्नपूर्वक उसके ठीक हो जाने तक उसकी सेवा-सुश्रुषा में उसके माता-पिता ने कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिये।


यदि उस असहाय बच्चे को आप मार्ग पर कहीं छोड़ रहे हैं तो यह अपने कर्तव्यों से पलायनवाद है। इस जन्म में आप यदि उसकी सेवा से मुँह मोड़ रहे हैं तो निश्चित मानिये कि कई जन्म-जन्मांतरों तक आपका वह कर्तव्य आपका पीछा नहीं छोड़ेगा। इसलिए परमात्मा ने जैसी भी संतान दी है, उसे उपहार मानकर उसकी सेवा कीजिये। भले ही इन बच्चों में मानसिक विकलांगता है तो भी ये स्नेह-प्रेम और वात्सल्य भरा आलिंगन समझते हैं, वे भी तरसते हैं कि कोई उन्हें अपनी ममताभरी बाँहों में भर ले। वात्सल्य पालनाघर के ऐसे ही बच्चों को नवजीवन प्रदान करने के लिए हमने वात्सल्य ग्राम, वृंदावन में विशेष बच्चों के स्कूल ‘वैशिष्ट्यम्’ (आवासीय विद्यालय एवं पुनर्वास केन्द्र) की स्थापना की है। परमशक्ति पीठ का यह अनूठा मानवसेवी प्रकल्प उन नन्हें बच्चों के जीवन को एक नई दिशा देने के पूरे प्रयत्न करेगा जो किसी भी प्रकार की मानसिक या शारीरिक विकलांगता के शिकार हैं। इन बच्चों को अपना वात्सल्य बाँटते हुए मैंने हमेशा अनुभव किया है कि चाहे इनका मस्तिष्क पूरी तरह से कार्य नहीं कर पाता हो लेकिन इनकी भावनाएं भी हम सामान्य मनुष्यों जैसी ही होती हैं। थोड़ा सा श्रम करके इन्हें दिया गया प्रशिक्षण कम से कम इन्हें इस योग्य तो बना ही सकता है कि अपने दैनिक जीवन के कुछ कार्यों में इनकी अन्य लोगों पर निर्भरता थोड़ी कम हो जाये। वात्सल्य ग्राम स्थित ‘वैशिष्ट्यम्’ में कुशल प्रशिक्षकों एवं सभी आवश्यक सुविधाओं के साथ ऐसे विशेष बच्चों को प्रशिक्षण देने का सत्प्रयास आरंभ किये जाने पर मुझे प्रसन्नता है। केवल वात्सल्य ग्राम के बच्चों ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण ब्रजप्रदेश के ऐसे विशेष बच्चों को यहाँ प्रवेश देकर उन्हें कुछ सीमा तक स्वावलंबी बनाने के प्रयत्न किए जाएंगे।

आभार - वात्सल्य निर्झर, अगस्त 2014